देश पुकारे...

देश पुकारे अब तुझे,भारत की संतान।
बिना कर्म संधान के,विपदा पड़ी महान।।

आएं सब निज कर्म की,करें शीघ्र पहचान।
आज आन जो दुख पड़ा,उसका करें निदान।।

कर्म सुयश देता सदा,कर्म ही सुखाधार।
मानें कर्म प्रधानता,करें देश को प्यार।। 

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