यह सच है

यह सच है
दौलत मोहती है
साथ नहीं जाती 
रूप ओस की बूँद है
टिकता नहीं बहुत दिन
प्रेम है अमर
जीवन के लिए जल
यह सदैव 
घूमता है वायुमंडल में 
जीवन देता है वनस्पतियों को
जीवों को जीवन देता है
सच ही यह प्रेम अमर्त्य है 
आदमी मर जाता है
मगर प्रेम रहता है सामने
दशरथ मांझी के पथ की तरह
रामेश्वरम के राम-पुल या
आगरा के ताजमहल की तरह।
                                    

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