जिंदगी के रथ में

जिंदगी के रथ में,लगाम बहुत है , 
अपनों के अपनों पर,इज्लाम बहुत हैं , 
ये शिकायतों का दौर देखता ,हूं तो थम सा जाता हूं 
लगता है उम्र कम है और,इम्तिहान बहुत हैं ...

Comments

Popular posts from this blog

रविदास होने का अर्थ ।

हेगेल का द्वंद्वात्मक सिद्धांत