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जल की उपलब्धता (Water availability)

भारत में विश्व के धरातलीय क्षेत्र का लगभग 2.45 प्रतिशत, जल संसाधनो का 4 प्रतिशत, जनसंख्या का लगभग 16% भाग पाया जाता है देश में 1 वर्ष में वर्षा से प्राप्त कुल जल की मात्रा लगभग  4000 धन किलोमीटर है धरातलीय जल से 1869 किलोमीटर जल उपलब्ध है | इसमें से केवल 60% जल का ही लाभदायक उपयोग किया जा सकता है इस प्रकार देश में कुल उपयोगी जल संसाधन 1122 घन किलोमीटर है| धरातलीय जल :- * धरातलीय जल के चार मुख स्रोत है- नदियां,झीलें ,तलैया और तालाब  • केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार भारत में सभी नदी वैसिनों में औसत वार्षिक जल प्रवाह लगभग 1869 घन किलोमीटर है. • गंगा ब्रह्मपुत्र और बराक नदियों के जल ग्रहण छेत्र में वर्षा अपेक्षाकृत अधिक होती है यह नदियां देश के कुल क्षेत्र के लगभग एक तिहाई भाग पर पाई जाती है जिनमें कुल धरातलीय जल संसाधनों का 60 प्रतिशत जल पाया जाता है. • दक्षिण भारतीय नदियों जैसे गोदावरी कृष्णा और कावेरी में वार्षिक जल प्रवाह का अधिकतर भाग काम में लाया जाता है लेकिन ऐसा ब्रह्मपुत्र और गंगा बेसिन में अभी भी संभव नहीं हो सका है| वर्षा जल और हिमपात:-     भारत में सला...

A Story of an UPSC Aspirant (अनकही कहानी पार्ट -3)

#तू_तो_ऐसी_न_थी( पार्ट- ३)  _______________________________ ....पर तुमने धृतराष्ट्र बनना ठीक समझा, तू तो ऐसी न थी..... हाँ तू तो ऐसी न थी. मैं तो गीत तुम्हारी गाता हूँ। शब्दों में तुमको पाता हूँ। प्रेमपूर्ण जो साध वही है, मन देना अपराध नहीं है। हो..तुम आज भी वही, तुमसे वात्सल्य वही पाता हूँ, यह कहते नहीं थकता हूँ। तू तो ऐसी न थी...... बन पराग..तुम आयी थी, मेरे बोझिल मन में, तुम मृदु पुष्प सकुचाई सी। जगता हूँ लेकर याद तेरी, यादों में फिर सो जाता हूँ । सूना है घर व आंगन तुम बिन, याद है,मुझे जब तुम आती थी, हवा, में भी खुशबू घूल जाती थी, बंद कर ऑखो को, मुस्काती तस्वीर निहारता हूँ काश समय चक्र घूमता और तुम आती.... दे स्नेह..मन-सदन सजाती । आओगे यह हृदय-ध्वनि सुन, नित्य दिन स्वप्न सजाता हूँ। पर नियति के हाथों मारा जाता हूँ, आज बोझिल मन हल्का हुआ, मन भर भार खत्म कर, तुमने फिर से कटे पर जोड़, खुले आसमान में उड़ने की, ऊचाईयो को छूने की, हिम्मत दें..... फिर से किया वादा, बन सखा साथ निभाऊंगा, साथ देखें सपने बन सखा पूरा करूँगा, पुनः वादा यह करता हूँ... तू...

#save_purnea_university मुहिम

# save_purnea_university मुहिम  में आप सब #बिहारवासी # सिमांचल वासी, सभी #अभिभावक , छात्र/छात्राएँ, #शिक्षक सभी विभागों के # कर्मचारी ,  सभी #जनप्रतिनिधि से 🙏 अपिल है, अपना # पूर्णिया विश्वविद्यालय बचा लिजीए, अपना सपनो का विश्वविद्यालय कैद हैं, तानाशाह के मुठ्ठी में, #विश्वविद्यालय को आजाद कराने में सहयोग दें. हमलोग आंदोलनरत है, यह आंदोलन सिर्फ वेतन के लिए ही नहीं है, यह बिहार के सम्मान व अस्मिता के लिए है. यहाँ कहा जाता है कि, बिहारी को कुछ नहीं आता. छोटे-छोटे विडियो बनाकर, अपलोड किजिए # save_purnea_university  twitter Facebook

#save_purnea_university मुहिम

# save_purnea_university मुहिम  में आप सब #बिहारवासी # सिमांचल वासी, सभी #अभिभावक , छात्र/छात्राएँ, #शिक्षक सभी विभागों के # कर्मचारी ,  सभी #जनप्रतिनिधि से 🙏 अपिल है, अपना # पूर्णिया विश्वविद्यालय बचा लिजीए, अपना सपनो का विश्वविद्यालय कैद हैं, तानाशाह के मुठ्ठी में, #विश्वविद्यालय को आजाद कराने में सहयोग दें. हमलोग आंदोलनरत है, यह आंदोलन सिर्फ वेतन के लिए ही नहीं है, यह बिहार के सम्मान व अस्मिता के लिए है. यहाँ कहा जाता है कि, बिहारी को कुछ नहीं आता. छोटे-छोटे विडियो बनाकर, अपलोड किजिए # save_purnea_university  twitter Facebook

पूर्णिया विश्वविद्यालय के आंदोलन

हे! क्रांति वीरों,  पूर्णिया विश्वविद्यालय के साथियों,  आप सब भाईयों को सलाम आपके विश्वास को सलाम आपकी संवेदना को सलाम.      हे! आजादी के नायको आप एक नया इतिहास बनाने जा रहे हैं, यह सिर्फ अब अपने हक हकूक की सिर्फ़ बात नहीं है, यह बात है, अपने खोये सम्मान को वापस पाने की,अपने परिवार के कष्ट को समाप्त करने की,  याद किजिए आपके साथ उन्होंने कितनी खुशीयो का गला घोटा है, याद किजिए जब भी हमसे हमारे छोटे कुछ मांगते तो हम सभी यही बात बोलते वेतन नहीं आया है. अब तो वे कुछ आशा भी नहीं रखते हमसे. हमारे संबंधी हमसे कतराते है. हमारी पत्नी, बच्चे सब आशा भरी नजरों से देखते हैं, परन्तु हम यही कहते आजाएगा.....   अब  वेतन के साथ साथ सभी जख्मों का हिसाब करना है.    इसलिए हे, वीरों डर को किनारे कर, एकता को स्थापित कर, विश्वास के साथ आइए, डरे नहीं, आप शिक्षा के मंदिर को आजाद करा रहे हैं, शिक्षको ,गुरुजनों के साथ इस आजादी में शरीक हो रहे हैं, यह बिहार को उसका सम्मान दिलवाने की बात हैं. # सिमांचल को उसका हक दिला रहे हैं,  # बिहार को उसका हक दिला रहे...

माता बच्चों की प्रथम गुरु व परिवार पाठशाला (Mother's first guru and family school)

माता  बच्चे की  प्रथम  गुरू व परिवार बालक की  प्रथम  पाठशाला कहलाता है। परिवार बालक के लिए व्यवस्था और योजना बनाते है वह उसे सुरक्षा देते है, मित्रता देते है, खेलने के लिए समय और उपकरण देते है। बालक का विकास एक सतत् प्रक्रिया है जो समय तथा शिक्षा व्यवहार बालक अपने  माता - पिता  के साथ-साथ समय व्यतीत करते हुए सीखते हैं             कहा गया है कि बालक अपना प्रथम पाठ माँ के चुम्बन और पिता के प्यार से ही सीखता है। बच्चों को सिखने कि प्रक्रिया तो गर्भ से ही शुरू हो जाती है(अभिमन्यु),वर्तमान में भी हम अपने बच्चों को अभिमन्यु सरीखे बना सकते है,  इसके लिए भी पिता के साथ यदि परिवार का भी सहयोग गर्भवती माँ के अनुकूल हो, इसके लिए माताओं को भी तत्परता व सिखने की ललक दिखानी होगी.   हमारे भारतवर्ष में इस प्रकार की अनेक उदाहरण वर्तमान में भी देखने को मिलता है (तथागत तुलसी)           वस्तुत: परिवार बालक की प्रथम पाठशाला है। जहाँ अपने परिजनों की छाया तले बैठकर अपनी सुसुप्त क्षमता व प्रतिभा को उजागर कर...

मैकाले शिक्षा

मैकाले को यकीनन ‘ब्रिटिश-भारत’ के निर्माताओं में से एक कहा जा सकता है. वह एक इतिहासकार भी था और राजनयिक भी. यह तय है कि उसने भारतीयों को हेय दृष्टि से ही देखा. पर यह भी उतना ही सत्य है कि उसने कुछ ऐसे काम किये जो हमारी आने वाली क़ानूनी और सामाजिक प्रणाली का आधार बने. अब तक हम उसके प्रभाव से उबर नहीं पाए हैं. यह हमारी कमतरी है क्या कुछ और?औद्योगिक क्रांति के बाद पश्चिमी समाज तरक्की करते हुए बाकियों से काफी आगे निकल आये थे. पश्चिम के लोगों को अब पूर्व और अफ्रीका के समाज कमतर लगते थे. उन्हें यहां का साहित्य, दर्शन सब कुछ ही बेढंगा लगता था. मैकाले भी इस भावना से ग्रसित था. उसने एक बार कहा था कि समूचे भारतीय साहित्य की तुलना में यूरोप की किसी अच्छी लाइब्रेरी का सिर्फ एक शेल्फ़ ही काफ़ी है. इस सोच के पीछे जेम्स मिल नाम का एक ब्रिटिश अफसर था जिसने भारत आये बिना यहां का इतिहास लिखा था. जेम्स मिल भारतीयों को इतना कमतर आंकता था कि उसके मुताबिक जो कुछ भी वैज्ञानिक या गणितीय विकास यहां हुआ वह सब पश्चिम के लोगों से चुराया हुआ था. इसी अवधारणा के आधार पर उसने शिक्षा पद्धति को विकसित करने का प्रयास किया....