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बेटी अनमाेल रत्न सा...

आज दिल का कोना खाली खाली सा    गिर रहा मेरी आंखों से आंसू मनमानी सा      लोग कहते हैं बेटी धन पराया सा     मैं कहती हूं कोई धन नहीं बेटी सा    बेटी है अनमोल रत्न सा     कड़ी धुप में शीतल छॉंव सा    तप्त धरा पर गिरते बूँदों सा    उलझन भरी जीवन के उपवन का    एक सुंदर मुखड़ा फूलों सा    गिर रहा मेरी आंखों से आंसू मनमानी सा    आज मेरी आंखों में नींद नहीं    याद आ रही कानों में घुलती    मिश्री सी बातें  बेटी की    कब माँ के आँचल से निकलकर    तू हो गयी इतनी बड़ी    दो जहां को रौशन कर रही    जलते दिए और बाती  सा    गिर रहा मेरी आँखों से आंसू मनमानी सा    आज मेरा घर सुना सुना सा    बेटी निभा रही दस्तूर ज़माने की    बांध प्रणय बंधन दे रही साथ साजन का    घर का रौनक बनकर    महकती रहे तू सदा खुशबू सा    अचल रहें अहिवात तुम्हारा     ...

वह सबकी प्यारी

वह  सबकी प्यारी  लली थी, मैं सबका प्यारा  लला था। वह  बड़े ही नाजों से  पली थी, मैं भी बड़े प्यार से  पला था। धीरे बढ़ी  गलियों में निकलने लगी, मेरे मन में   वह तुलसी बन  पलने लगी। देख उसको  सूरज निकलने लगा, उसको ही देख  शाम ढ़लने लगी। उसके घर तक ही  मेरा हर रास्ता था, सारी दुनिया में उसका  मुझसे वास्ता था वह थी मैं था  उसका मेरा  हमारा मन था महका है  मन में वह  जो तुलसी का उपवन था हाँ! याद है प्यार.. तुलसी का  उपवन में...! सुरभित है  मेरे अस्तित्व का  कण-कण में...!

क्या वक्त कभी ठहरा..

   दिन भारी भारी है    रात भी सहमा सहमा है    तो क्या हुआ ...    गुजर जायेगा ये लम्हा भी    क्या वक़्त कभी ठहरा है    वीरान हुई सड़कों पर    फिर से चहल पहल होगी    खो चुकी गलियारों की रौनक    फिर से गुलजार होगी    फिर से खनक उठेगी    चूड़ियों की आवाजें    मंदिर की घंटी की मधुर ध्वनि    से गूंज उठेगा देवालय    और मन में फिर से     विश्वास और आस्था भरेगी     बच्चों की खिलखिलाहट से     दमक उठेगी स्कूल की चारदिवारी     हम स्कूल चले हम स्कूल चले     का शोर गूंजेगा हर तरफ        फिर जमेंगी चौपालें      मिल बैठेंगे दोस्त यार      एक दूसरे का हाल पूँछेगे      और फिर हंसी के फव्वारे छूटेंगे      लेकिन बदल जायेगा बहुत कुछ     बदल जायेगी जीवन शैली     बहुत कुछ सीखा कर     ये वक़्त गुजर जायेगा  ...

यादें, याद आती है

पत्ते-पत्ते पर, तेरा ही नाम लिखा है,  संग जो बीता लम्हा ,तमाम लिखा है। सपनों में बनेगा घरोंदा,वो आम लिखा है,  शूल बन चुभती हैं ,पुरानी यादें मन में, गाती हैं दिशाएं ,अब क्रंदन के सुर में।  तु ही सुबह,तु ही शाम लिखा है हर जर्रे में तेरे लिए ,सलाम लिखा है। जाने क्यों जग वाले,अब हमारे प्रेम से जलते हैं, हम क्यों, सबकी आंखों में खलते हैं।  हरसूं  दिलों का ,कत्ले-आम लिखा है,  पत्ते-पत्ते पर ,तेरा ही नाम लिखा है | यहाँ जग भले जले ,पर प्यार पलेगा, कारवां तो प्रेमियों का ,हरदम चलेगा। प्यार के नाम,मस्ती का जाम लिखा है,  पत्ते- पत्ते निशि, तेरा ही नाम लिखा है ||

हर कर्तव्य निभाना होगा

हर कर्तव्य निभाना होगा ।आगे कदम बढ़ाना होगा ।।जीवन में कठिनाई आए ,संघर्षों के बादल छाए।           हर पग ठोकर जब भी खाई-सँभले हम गिरने कब पाए।।मृत्यु नाचती देती दस्तक , तुमको दूर भगाना होगा।।भयाक्रांत परिवेश हुआ है ,मन में सबके क्लेश हुआ है । बंद सभी बैठे कमरों में -व्याधि ग्रस्त जन देश हुआ है।।बने चिकित्सक जिम्मेदारी,मन को कड़ा बनाना होगा ।।साहस मन का बाकी रखना । धीरज मन का कभी न डिगना  । बहुत कड़ी हैं जीवन राहें-विचलित मन को साधे रहना ।।अर्थ व्यवस्था भी डगमग है , भारत सबल बनाना होगा।।बना वायरस प्रलयंकारी,सीमा पर भी रण है जारी।   जूझ रहे हैं सब संकट से -चिंता से मन होता भारी।।   वीर सिपाही नमन तुम्हें है,सीमा पर अब जाना होगा।।

बेटे कहे गरीब के..

बेटे कहे गरीब के,       सबसे सदा पुकार। हो सकता तो बन्द हो,  शिक्षा का बाजार।। फीस जेब में है नहीं,    सपने सजे हजार। शिक्षा के बाजार में,     हर निर्धन लाचार।। दौलत हित बनती यहाँ,दौलत की सरकार। निर्धन निर्धन ही सदा,    रहने को लाचार |

रोने से नहीं होती नैया पार

रोने से होती नहीं, डगमग नैया पार। साहस करने से सदा,मिलती मंजिल यार।। नैन बसे वह चेहरा, छोड़ गये जो साथ। जगह लगाती आग वह, जहाँ धरे थे हाथ।। पूजा था जिसको सदा,अपना सब कुछ मान। धोखा देकर वह सजन, वही ले गयी जान।।